नई दिल्ली। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने साफ किया है कि देश में पहले से मंजूर r-DNA (रिकॉम्बिनेंट DNA) दवा उत्पादों के निर्यात के लिए अब अलग से एक्सपोर्ट NOC लेने की जरूरत नहीं होगी, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों। उद्योग की ओर से लगातार उठ रहे सवालों के बाद यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के नोटिस के अनुसार, अगर किसी कंपनी के पास किसी r-DNA उत्पाद के लिए फॉर्म CT-23 में वैध मार्केटिंग ऑथराइजेशन है और वह उसी उत्पाद के निर्यात के लिए फॉर्म 28-D में अनुमति चाहती है, तो अलग NOC नहीं लेनी होगी।
शर्त यह है कि उत्पाद की संरचना, स्पेसिफिकेशन, स्ट्रेंथ, डोसेज फॉर्म, पैकेजिंग, निर्माण स्थल और प्रक्रिया में कोई बदलाव न हो। केवल निर्यात के लिए अलग ब्रांड नाम ही एकमात्र अंतर होना चाहिए। ऐसी कंपनियां सीधे ONDLS पोर्टल के जरिए संबंधित राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी को आवेदन कर सकेंगी।
CDSCO ने कहा है कि जो r-DNA उत्पाद इस दायरे में नहीं आते, उनके लिए मौजूदा प्रक्रिया के तहत मात्रा-आधारित (क्वांटिटी-स्पेसिफिक) एक्सपोर्ट NOC लेना जारी रहेगा। इस फैसले से बायोलॉजिक्स निर्यात करने वाली कंपनियों का कागजी काम कम होने की उम्मीद है।
