DCGI ने 100 से अधिक कफ सिरप के लंबित होने की जानकारी दी

DCGI: भारत से घटिया कफ सिरप के निर्यात पर कार्रवाई का असर सभी निर्यातकों पर पड़ रहा है। निर्यात के लिए बनाई गई कफ सिरप का विश्लेषण करने वाली सरकारी परीक्षण सुविधाओं में नमूनों की संख्या लंबित देखी जा रही है। भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) डॉ राजीव सिंह रघुवंशी के अनुसार, देश में सात नामित प्रयोगशालाओं में से कम से कम दो में 100 से अधिक कफ सिरप परीक्षण के अधीन हैं।

सरकारी प्रयोगशालाओं में परीक्षण के तहत लंबित कफ सिरप के नमूनों और मंजूरी में देरी ने निर्माताओं को दवा नियामक से विश्लेषण के लिए वैकल्पिक तंत्र की तलाश करने के लिए मजबूर किया है। सरकार ने निर्यातकों की समस्या पर ध्यान दिया है। नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) को निजी परीक्षण प्रयोगशालाओं की एक सूची तैयार करने के लिए कहा गया है, जहां कफ सिरप के नमूने विश्लेषण के लिए भेजे जा सकते हैं।

प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए कोई नमूना नहीं (DCGI)

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) राजीव सिंह रघुवंशी ने  दवा निर्यातकों को दो अलग-अलग संचार में 100 से अधिक कफ सिरप के लंबित होने की जानकारी दी। डीसीजीआई ने पत्र में कहा, 3 जुलाई के आंकड़ों के आधार पर, यह देखा गया है कि आईपीसी गाजियाबाद और सीडीटीएल मुंबई में 100 से अधिक कफ सिरप परीक्षण के अधीन हैं और कुछ प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए कोई नमूना नहीं है। पत्र में रघुवंशी ने निर्माताओं और निर्यातकों से अनुरोध किया है कि वे गाजियाबाद और मुंबई परीक्षण सुविधा में कोई भी नमूना तब तक जमा न करें, जब तक कि सभी नमूनों का विश्लेषण नहीं हो जाता और रिपोर्ट जारी नहीं हो जाती। निर्माताओं और निर्यातकों से अनुरोध है कि वे सीडीएससीओ की वेबसाइट की जानकारी को दैनिक आधार पर सत्यापित करें और उन प्रयोगशालाओं में नमूने जमा करें जहां नमूनों की संख्या कम या कम है।

नियामक को बेईमान तत्वों को संदेश भेजने की जरूरत

फार्मा निर्यात की देखभाल करने वाली सरकारी संस्था फार्मेक्सिल के महानिदेशक रवि उदय भास्कर ने कहा कि भारतीय नियामक को मूल कारण विश्लेषण करने की आवश्यकता है। मिलावटी दवाओं के निर्यात में शामिल तीन कंपनियों के निर्यात पंजीकरण को निलंबित करने वाले भास्कर ने कहा कि कफ सिरप के नमूनों का परीक्षण करने के बजाय नियामक को दवा संयंत्रों में अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (जीएमपी) के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

Also read: देश के 40 शहरों में शुरु हुआ अपोलो चिल्ड्रेन्स

दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हुए गुणवत्तापूर्ण दवा का उत्पादन करने का दायित्व निर्माता को स्वयं करना चाहिए, इसके लिए सरकारी परीक्षण प्रयोगशालाओं को क्यों लगाया जाना चाहिए? कल अगर कोई निर्माता परीक्षण के लिए एक अलग नमूना भेजता है और दूषित उत्पाद निर्यात करता है, तो हमारी परीक्षण प्रयोगशालाएं आग की चपेट में आ जायेगी।

 

Related Posts

जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी

सिरसा (हरियाणा)। जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर स्थित टीबी भवन में संचालित ओएसटी सेंटर में यह वारदात हुई। रात के…

नशीली दवा के अवैध कारोबार पर लगेगी रोक, AI पोर्टल से होगी निगरानी

रांची (झारखंड)। नशीली दवा के अवैध कारोबार पर रोक लगाई जाएगी। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विशेष पोर्टल तैयार किया है। इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) और राज्य के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 16 views
जिला नागरिक अस्पताल से 6800 नशीली टैबलेट चोरी

नशीली दवा के अवैध कारोबार पर लगेगी रोक, AI पोर्टल से होगी निगरानी

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 16 views
नशीली दवा के अवैध कारोबार पर लगेगी रोक, AI पोर्टल से होगी निगरानी

HIV रोकथाम की भारतीय जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 14 views
HIV रोकथाम की भारतीय जेनेरिक दवा को अमेरिकी मंजूरी

दवा और चिकित्सा उपकरणों के आयात केंद्रों के विस्तार का प्रस्ताव

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 13 views
दवा और चिकित्सा उपकरणों के आयात केंद्रों के विस्तार का प्रस्ताव

नशीली दवा के हिसाब में गड़बड़ी, 44 स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड

  • By Desk
  • November 4, 2026
  • 14 views
नशीली दवा के हिसाब में गड़बड़ी, 44 स्टोर के लाइसेंस सस्पेंड

एस्ट्राजेनेका फार्मा से 151 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक

  • By Desk
  • November 3, 2026
  • 21 views
एस्ट्राजेनेका फार्मा से 151 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक