बीकानेर (राजस्थान)। प्रसूताओं की किडनी फेल मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट मिल गई है। प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल (पीबीएम) सरकारी हॉस्पिटल में 5 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। इस मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट देने की तैयारी है। जोधपुर से बीकानेर पहुंची 6 डॉक्टर्स की टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

जांच टीम ने इलाज में डॉक्टर्स की लापरवाही नहीं मानी है। टीम ने वार्ड में भर्ती प्रसूताओं से बातचीत की। साथ ही उनको अब तक दिए ट्रीटमेंट के बारे में भी जानकारी ली। इसके अलावा ओटी, आईसीयू और वार्ड का भी निरीक्षण किया। सुपरिटेंडेंट डॉ. बीसी घीया ने बताया कि जांच टीम अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौपेंगी। टीम के सभी सदस्यों ने पीबीएम हॉस्पिटल में प्रसूताओं के इलाज को सही माना है। इसमें कहीं भी लापरवाही सामने नहीं आई है। जबकि प्रसूताओं को लगाए गए इंजेक्शन की जांच ड्रग कंट्रोलर विभाग कर रहा है। इसकी रिपोर्ट करीब 5 दिन में आने की संभावना है।

80 तरह की दवाइयों की नहीं हो रही सप्लाई

सीनियर डॉक्टर्स के अनुसार जिले के हॉस्पिटल में 80 तरह की दवाइयों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसके कारण जरूरत पड़ने पर ये सभी दवाइयां हॉस्पिटल प्रशासन अपने स्तर पर खरीद रहे हैं। यही हालात ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में भी सामने आए हैं।

बीते 6 महीनों में करीब 25 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के वॉयल लोकल स्तर पर खरीदे गए। सरकारी खरीद में ये इंजेक्शन चार से पांच रुपए प्रति इंजेक्शन की दर से खरीदे जाते हैं। जबकि बाजार से इन्हें करीब 18 रुपए में खरीदा गया है। सरकारी खरीद की दर से तीन से चार गुना महंगी है। इन इंजेक्शन के वॉयल के बैच की टेस्टिंग को लेकर भी अब जांच की जा रही है। निर्माता कंपनी से पूरी तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई है।