बरेली। फर्जी आयुर्वेदिक दवा कंपनी का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साजिद इस्लाम और जफर ने फर्जी कंपनियां बनाई। वे बीमारियों का उपचार करने का दावा करने लगे। शुगर जैसी बीमारियों को खत्म करने का दावा करते। एक फर्जी काल सेंटर और वेबसाइट भी तैयार की थी।

लोगों से बात करने के बाद उनसे दवाओं का आर्डर कराते। कोरियर कंपनियों से लोगों को दवाएं सप्लाई कराते थे। पुलिस ने सूचना के बाद छापेमारी की। मौके से 75 डिब्बे नकली दवाएं, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किए हैं। इन दवाओं की गुणवत्ता भी संदिग्ध है। आरोपित ने अपने गिरोह के दो और सदस्यों के नाम बताएं हैं। पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी है।

यह है मामला

पुलिस को सूचना मिली कि मकान में कुछ लोग नकली दवाओं का कारोबार कर रहे हैं। फर्जी कंपनियों की मदद से दवाएं पहुंचाई जाती हैं। पुलिस ने मौके से साजिद मलिक, इस्लाम और मो. जफर को पकड़ा। लैपटाप, मोबाइल और 75 डिब्बों में दवाएं हुई मिली। उनसे दवाएं बेचने का लाइसेंस नहीं िमल पाया।

आरोपितों ने आरके इंटरप्राइजेज, डियाबो-वीटा केयर जैसे नाम से फर्जी कंपनियां बनाई हैं। पुलिस ने सभी दवाएं, लैपटाप और मोबाइल बरामद किए हैं। आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के काम में रऊफ और रिजवान मियां भी शामिल हैं। रऊफ और साजिद सगे भाई हैं। आरोपी अपनी दवाओं का सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार करते थे। तीन दिन में बीमारी काे जड़ से खत्म करने का दावा करते थे।

सभी दवाओं की कीमत एक हजार से 1450 रुपये के बीच होती थी। दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग भी संदिग्ध मिली है। दवाएं तैयार कराने का काम रऊफ और रिजवान देखते थे। इस्लाम कंपनी का टेक्निकल सपोर्ट देखता था। फेसबुक और इंस्टा पर शुगर की बीमारी के ठीक होने का प्रचार करता।