नई दिल्ली। दवा खरीद घोटाले के बाद सरकार ने सीपीए पर रोक लगा दी है। अंतरिम व्यवस्था के तहत दवा-चिकित्सा सामान खरीद की जिम्मेदारी अस्पतालों को दे दी है।
यही नहीं, सीपीए के सभी लंबित, अधूरे और प्रक्रिया में चल रहे टेंडर को भी रद कर दिया है। इनसे संबंधित मांगपत्र भी अस्पतालों को वापस कर दिए हैं। यह अंतरिम व्यवस्था केंद्रीकृत खरीद के लिए ढांचे को नए सिरे से चालू होने तक लागू रहेगी।
यह है मामला
650 करोड़ रुपये की दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाला सामने आया है। जांच व कार्रवाई से सीपीए की खरीद व्यवस्था सवालों के घेरे में है। इससे दिल्ली सरकार के अस्पतालों में जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित हो गई थी। अस्पतालों की नियमित व्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा था। इसे दूर करने को सरकार ने अस्पतालों को फिर सीधे खरीद की जिम्मेदारी सौंप दी है।
2025 में केंद्रीकृत हुई थी खरीद
स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की खरीद सीपीए के तहत केंद्रीकृत कर दी थी। इससे पहले अस्पतालों के माध्यम से खरीद की जाती थी। एक वर्ष के भीतर ही सीपीए में 650 करोड़ का खरीद घोटाला सामने आ गया। इसके बाद सरकार ने पुरानी व्यवस्था को बहाल कर दिया। अब संबंधित सरकारी अस्पताल सीधे खरीद करेंगे। अभी इसे अंतरिम व्यवस्था के तहत लागू किया गया है। इसके साथ ही अस्पताल मरीजों के उपचार से सीधे जुड़ी आवश्यक दवाओं की खरीद भी जारी रखेंगे।










