शिमला (हिमाचल प्रदेश)। नकली दवा के उत्पादन, नकली पहचानपत्र के इस्तेमाल और जीएसटी चोरी पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में प्रदेश सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने अनमोल सिंह राणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया।

कंपनी के निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने 275 किलो नकली दवा एक्सपोलटेब का बिक्री रिकॉर्ड छुपाया। बिना लाइसेंस भारी मात्रा में फर्जी दवाएं बनाईं। यह ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 का उल्लंघन है। दवा विभाग ने जुलाई 2023 में इनका थोक दवा लाइसेंस रद कर दिया था। नालागढ़ की अदालत ने जनवरी 2024 में इन्हें भगोड़ा घोषित किया था।

यह है मामला

28 टन फार्मास्युटिकल सामग्री (रा मटिरियल) की अवैध सप्लाई व जीएसटी चोरी की बात सामने आई है। इसमें अवैध तरीके से कमाए गए काले धन की जांच जरूरी है। राज्य स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने पत्र लिखकर इस मामले की जांच में अपनी लाचारी जताई। कहा गया कि उनके पास मैनपावर, संसाधनों और डोमेन ज्ञान की कमी है। इससे वे इतनी जटिल वित्तीय हेराफेरी की जांच नहीं कर सकते। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। साथ ही अन्य आरोपितों को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 तय की है।