अनमैरिड युवतियों को ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ा खतरा, देश में तीसरे नंबर पर हरियाणा

रोहतक। देशभर में 31 अक्टूबर तक स्तन कैंसर जागरूकता माह मनाया जा रहा है। जिसमें महिलाओं को रोजाना बढ़ रही बीमारी ब्रेस्ट कैंसर के प्रति आगाह करने के साथ ही इससे बचने और इलाज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज भारत में ब्रेस्ट कैंसर किस हद तक अपने पैर पसार चुका है। अगर थोड़ी सी लापरवाही हुई तो कोई भी महिला इसकी चपेट में आ सकती है और उसे इलाज के कठिन चरणों से गुजरना पड़ सकता है।

हरियाणा में स्तन कैंसर के चौंकाने वाले केस सामने आ रहे हैं। देश भर में स्तन कैंसर के मामलों में प्रदेश का टाप पांच राज्यों में तीसरा स्थान है। सबसे अधिक स्तन कैंसर के मामले केरल में है। स्तन कैंसर की जद में कम उम्र की महिलाओं के आने पर क्षेत्रीय कैंसर संस्थान रोहतक के चिकित्सक रिसर्च में जुटे हैं लेकिन अभी तक इसकी ठोस वजह तक नहीं पहुंच पाए हैं।

पीजीआई रोहतक में स्तन कैंसर के मामले पांच वर्ष पहले तक 40 से 60 साल की महिलाओं में ही आते थे लेकिन अब कुंवारी लड़कियों भी इसकी जकड़ में आती जा रही है। खासकर ऐसी लड़कियां जिनकी शादी 30 वर्ष तक नहीं होती। ये हम नहीं कह रहे रोहतक पीजीआई के विशेषज्ञ कह रहे हैं। उनका कहना है कि महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रदेश के एकमात्र क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में स्तन कैंसर के हर सप्ताह 20 से 25 नए केस आ रहे हैं। जिसके अनुसार साल में अकेले स्तन कैंसर से प्रदेश की करीब हजार से 1200 महिलाएं इसका शिकार बन रही हैं।

पीजीआइ के प्रोफेसर डा. संजीव प्रसाद के अनुसार स्तन कैंसर के चार स्टेज हैं। पहली व दूसरी स्टेज में स्तन कैंसर में गांठ बन जाती है या फिर स्तन से खून आना शुरु हो जाता है। इसके अलावा गांठ बगल में भी चली जाती है। तीसरी स्टेज में कैंसर चमड़ी में पहुंच जाता है। वहीं अंतिम स्टेज में शरीर के अन्य हिस्सों फेफड़ों, लीवर, दिमाग व हड्डियाें में पहुंच जाता है।

पीजीआइ के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में दूसरे से अंतिम स्टेज के मरीज आते हैं। एकाध मरीज ही शुरुआत में यहां पहुंचता है। हर साल करीब 200 स्तन सर्जरी व 200 के करीब ही मरीजों को कीमोथैरेपी व रेडियोथैरेपी से मरीजों का सफल उपचार होता है। पहली व दूसरी स्टेज में मरीज का सफल उपचार संभव है। तीसरी स्टेज से भी दवा के माध्यम से मरीज को सेंकेड स्टेज तक लाया जा सकता है। जिससे वह दस से बीस साल की जिंदगी बढ़ जाती है। वहीं अंतिम स्टेज के मरीज उपचार के दौरान केवल चार से पांच साल ही निकाल पाते हैं।

रोहतक पीजीआइ के विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. संजीव प्रसाद के अनुसार कुंवारी लड़कियों में भी स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। अब तो 25 साल की युवतियों में स्तन कैंसर के केस आ चुके हैं। स्तन कैंसर में प्रदेश टाप फाइव राज्यों में नंबर तीन पर है। कैंसर केसों को लेकर उनकी रिसर्च चल रही है। हर साल करीब एक हजार से अधिक स्तन कैंसर केस आ रहे हैं। हर साल करीब 400 मरीजों को सफल उपचार यहां पर हो रहा है।