किडनी फेल – सुखद सरकारी योजना के बीच भयभीत कर रहा आंकड़ा

नई दिल्ली
अभी ताजा बजट में ही किडनी रोगियों के लिए सरकार ने ‘राष्ट्रीय डायलिसिस सेवा कार्य क्रम की शुरुआत करने का प्रस्ताव रखा है, जो बड़ी राहत की खबर थी, लेकिन गुर्दा रोगियों के संबंध में सामने आए सच ने भयभीत कर दिया। आंकड़े बताते हैं कि भारत में किडनी फेल होने के मामलों में पिछले 15 सालों में दोगुनी वृद्धि हुई है और डायलिसिस करवाने वाले मरीजों की संख्या में 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसकी जानकारी दी है। मुंबई के एसआरवी अस्पताल के कंसलटेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार ने बताया, अनुमान के मुताबिक लगभग 75,000 मरीज इस समय डायलिसिस पर है और उनकी संख्या सालाना 10 से 20 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। अब सवाल यह है कि क्या भारत में तेजी से बढ़ती किडनी के मरीजों की संख्या को संभालने के लिए संसाधन और विशेषज्ञ हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत स्वास्थ्य क्षेत्र पर ग्रोस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट (जीडीपी) का एक फीसदी खर्च करता है, जबकि चीन 3 फीसदी और अमेरिका 8.3 फीसदी खर्च करता है। पहले के आंकड़ों से पता चला था कि किडनी के रोग के शिकार 65 फीसदी मरीजों को समय पर डायलिसिस और उपचार नहीं मिल पाता है।

सेवेन हिल्स और ब्रीच कैंडी अस्पताल के डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप के मुताबिक किडनी फेल होने का प्रमुख कारण मधुमेह की बीमारी है और अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में इसके 10 लाख मरीज डायलिसिस के कारण ही जिंदा हैं। उन्होंने कहा, भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है इसलिए किडनी फेल होने के खतरे वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। सालाना 3.5-4 मामले किडनी में गड़बड़ी संबंधी मामले सामने आते हैं। वोकहाड्र्ट अस्पताल के डॉ. एम. एम. बहादुर का कहना है, हर साल 2 लाख मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है, लेकिन 10 फीसदी से भी कम मरीजों को यह उपलब्ध हो पाता है। क्योंकि इस पर आने वाले खर्च से लेकर उपलब्धता तक की समस्या है।

बजट सत्र में वित्त मंत्री ने कहा था कि भारत में प्रति वर्ष गुर्दे की बीमारी के अंतिम चरण में पहुंच चुके 2.2 लाख नए रोगियों की बढोतरी हो रही है। परिणाम स्वरूप 3.4 करोड डायलिसिस सत्रों की अतिरिक्तमांग बढ गई है। उन्होंने कहा, ‘भारत में लगभग 4950 डायलिसिस केंद्र हैं जो निजी क्षेत्र और प्रमुख नगरों में हैं। इस वजह से आधी मांग की ही पूर्ति हो पाती है। प्रत्येक डायलिसिस सत्र के लिए लगभग 2000 रुपये का खर्च आता है जो प्रति वर्ष 3 लाख रुपये से अधिक बैठता है। अधिकतर परिवारों को डायलिसिस सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करके कई चक्करलगाने पडते हैं जिनसे यात्राओं पर भारी खर्च होता है। सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस सेवा मुहैया कराने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकारी निजी भागीदारी मोड के जरिये निधियां उपलब्ध कराई जाएंगी।