पंजाब   के ड्रग इंस्पेक्टर व जेडएलए कर रहे क्लर्क वाली नौकरी

पंजाब: केंद्रीय सरकार ने दवा विके्रताओं के ड्रग्स लाइसेंस नवीकरण हेतु तमाम औपचारिकताओं को समाप्त करते हुए मात्र फीस का चालान फार्म वह पुराने ड्रग्स लाइसेंस की छायाप्रति एवं विभाग द्वारा जारी एक सूक्ष्म जानकारी वाला फार्म ही भर कर औषधि प्रशासन को जमा करवाने की नीति को ठेंगा दिखाने वाली कार्य प्रणाली अपनाई हुई है। जिला स्तर पर दवा विक्रताओं से लंबी-चौड़ी औपचारिकताओं को औषधि प्रशासनिक अधिकारी ड्रग इंस्पेक्टर तथा जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी को निजी तौर पर फाइलें वेबसाइट पर अपलोड करते और ओटीपी कोड जारी करते हुए देखा तो ऐसा लगा की या तो इन अधिकारियों को केंद्रीय सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश वाली नोटिफिकेशन नहीं मिली या अपनी पिछली पेंडिंग कागजी कार्यवाही को अपडेट करने में व्यस्त हैं। जब इस बारे एक जिले के जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी को जिज्ञासावश पूछा कि अन्य राज्यों में तो केंद्रीय सरकार के निर्देशों पर नवीकरण प्रणाली अति सुगम बनने के बाद जहां दवा विक्रेता राहत महसूस कर रहे हैं, वही ड्रग अधिकारियों को भी कागजी पचड़ों से छुटकारा मिल चुका है तो यहां ऐसी कार्यप्रणाली क्यों अपनाई जा रही है जिसके उत्तर में जेड एल ए ने कहा कि हम निजी तौर पर ओटीपी जारी करते हैं जिससे हमारी तसल्ली हो जाती है की वाकई दुकानदार ने अपने कागजात साइट पर अपलोड कर दिए हैं इसी लिए ये कार्य स्वयं कर रहे हैं जबकि केंद्रीय सरकार के निर्देशों में ऐसा कहीं भी वर्णित नहीं की नए लाइसेंस के लिए कागजात अपलोड करने के बाद नवीकरण मात्र पहले हार्ड कॉपी कार्यालय में देने से थी, नवीकरण हो जाता था जिसे केंद्र सरकार ने दवा व्यवसाई को कागजी कार्रवाई यों से राहत दिलवाने के मन से मात्र एक दो जरूरी दस्तावेजों को हार्ड कॉपी के रूप में औषधि प्रशासन को उपलब्ध करवा नवीकरण की प्रक्रिया अत्यंत आसान बनाई जा चुकी है तो पंजाब में लंबी चौड़ी पेचीदगियां समझ से परे हैं ना जाने किन अपरिहार्य कारणों के चलते हैं दवा व्यवसाई व उनके संगठन स्तर के नेता क्यों चुप्पी साधे हुए हैं।