इन दवाओं के इस्तेमाल से कम हो जाता है कोविड मरीजों में मौत का खतरा- WHO

नई दिल्ली। दो एंटी-इंफ्लेमेशन दवाओं को कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में कारगर पाया गया है और इन्हें मिलाकर देने पर अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा कम हो जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इंटरल्यूकिन-6 नामक एक प्रोटीन को कम करने वाली दवा को कोर्टिकोस्टेरोइड नामक दूसरी दवा के साथ देने से कोरोना मरीजों में मौत का खतरा और सांस लेने में मदद की जरूरत कम हो जाती है। WHO के अनुसार, जब गंभीर रूप से बीमार कोविड मरीजों का इम्युन सिस्टम अत्यधिक प्रतिक्रिया देता है तो इंटरल्यूकिन-6 नाम की प्रोटीन बनती है। इससे WHO शोधकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती मरीजों पर ऐसी दवाओं का असर का अध्ययन करने का विचार आया जो इस प्रोटीन को ब्लॉक कर सकती हैं। इस शोध में उन्होंने पाया कि कोर्टिकोस्टेरोइड के साथ इस्तेमाल करने पर ये दवा मौत के खतरे को केवल कोर्टिकोस्टेरोइड के मुकाबले 17 प्रतिशत कम कर देती है।

शोध में सामने आया कि इंटरल्यूकिन-6 को ब्लॉक करने वाली दवा के साथ कोर्टिकोस्टेरोइड का इस्तेमाल करने पर कोविड मरीजों में 28 दिन के अंदर मौत का खतरा कम हो गया। इस समूह में मौत का खतरा 21 प्रतिशत था, जबकि स्टैंडर्ड दवाओं पर मौत का खतरा 25 प्रतिशत है। इसका मतलब हर 100 मरने वाले मरीजों में से चार अतिरिक्त मरीज बच सकेंगे। वेंटीलेटर पर चल रहे मरीजों में भी मौत का खतरा 21 प्रतिशत कम हो गया। 11,000 मरीजों पर हुए 27 ट्रायल्स से ये नतीजे प्राप्त हुए जिन्हें स्टडी जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित किया गया है। इसे WHO ने किंग्स कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और सैंट थॉमस NHS फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया।

गरीब देशों तक पहुंचनी चाहिए दवाएं- WHO विशेषज्ञ
WHO हेल्थ इमरजेंसी के क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रमुख जैनेट डियाज ने इन नतीजों पर कहा, “वैश्विक वैक्सीनेशन में असमानता को देखते हुए गरीब देशों के लोगों पर गंभीर कोविड-19 का सबसे अधिक खतरा है। इन्हीं लोगों को इन दवाओं की जरूरत है। वहीं यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की MRC क्लिनिकल ट्रायल्स यूनिट के शोधकर्ता क्लेयर वेले ने कहा, “ये नतीजे वैश्विक प्रयासों को दर्शाते हैं और इनसे कोविड के कारण भर्ती हुए मरीजों के बचने की संभावना बढ़ेगी।”

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