मुंबई। Dr Reddy’s की दवा को इंडिया के सीडीएससीओ से मंजूरी मिल गई है। कंपनी को उसके जेनेरिक ओरल सेमाग्लूटाइड टैबलेट्स के लिए अप्रूवल मिला है। यह अप्रूवल  1,600 करोड़ के वेट-लॉस और एंटी-डायबिटीज ट्रीटमेंट मार्केट में बड़ा कदम है।

क्लीनिकल डेटा, स्टॉक परफॉर्मेंस और कॉम्पिटिशन 

यह अप्रूवल 3 mg, 7 mg, और 14 mg स्ट्रेंथ वाले टैबलेट्स के लिए है। इस दवा ने नॉन-इन्फीरियोरिटी दिखाई है। इसे टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस के सप्लीमेंट्री ट्रीटमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत का GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट मार्केट तेजी से बदल रहा है। इसकी वजह से Sun Pharma, Zydus Torrent Pharma जैसी घरेलू कंपनियां अपने वर्जन लॉन्च करने में जुटी हैं। Torrent Pharma ने Semalix और Sembolic के लिए एक इंटरिम एग्रीमेंट कर लिया है। Dr. Reddy’s का लक्ष्य मार्केट का लगभग 7% हिस्सा हासिल करना है।

पेटेंट का पेंच और SNAC का खेल

Novo Nordisk का ओरल फॉर्मूलेशन पेटेंट 2031 तक वैध है। यही पेटेंट SNAC की कंसंट्रेशन को Dr. Reddy’s और Torrent Pharma के खिलाफ लिटिगेशन का एक अहम बिंदु बनाता है। Novo Nordisk का स्पेसिफिक SNAC फॉर्मूलेशन 0.65-2.1 mmol की रेंज में आता है। जो कि लीगल डिस्प्यूट्स का मुख्य बिंदु है। उम्मीद है कि कीमतें 50-85% तक गिर जाएंगी। जिससे सभी प्लेयर्स के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

ब्राज़ील में झटका और एनालिस्ट्स की राय

इस मंजूरी के बावजूद, Dr. Reddy’s को ब्राज़ील में एक रेगुलेटरी झटका लगा है। ANVISA ने इसकी सेमाग्लूटाइड जेनेरिक, Embeltah, के रजिस्ट्रेशन से इंकार कर दिया था। यह रिजेक्शन एक बड़े इमर्जिंग मार्केट में कंपनी की संभावित एंट्री को प्रभावित करता है। बाजार में 40 से अधिक जेनेरिक कंपनियों के उतरने की उम्मीद है। जिससे एक तेज प्राइस वॉर शुरू हो सकती है।