नई दिल्ली। पैनक्रियाटिक कैंसर में नई दवा को मरीजों के लिए वरदान माना जा रहा है। कैंसर के सबसे खतरनाक प्रकार में पैनक्रियाटिक कैंसर का नाम भी शामिल है। एक रिसर्च ने मरीजों के दिल में उम्मीद की नई किरण जगाई है।

एक नई टैबलेट ने एडवांस पैनक्रियाटिक कैंसर से पीडि़त मरीजों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद की है। हालांकि यह दवा कैंसर को पूरी तरह ठीक नहीं करती। लेकिन यह इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

इस नई टैबलेट का नाम डैराक्सोनरासिब है। पैनक्रियाटिक कैंसर के ज्यादातर मामलों में एक म्यूटेटेड प्रोटीन ट्यूमर को बढ़ाता है। दशकों से वैज्ञानिक इस प्रोटीन को रोकने का तरीका ढूंढ रहे थे। सफलता नहीं मिल पा रही थी। अब यह नई दवा इसी म्यूटेटेड प्रोटीन को ब्लॉक करने का काम करती है।

यह रिसर्च न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश हुई है। हाल ही में शिकागो में अमेरिकन सोसाइटी फॉर क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की बैठक में इसे प्रेजेंट किया गया। इस स्टडी में 500 मरीजों को शामिल किया गया था। इनका कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका था। इन पर पिछला इलाज बेअसर हो चुका था।
इन मरीजों को दो ग्रुप्स में बांटकर यह टैबलेट या फिर कीमोथेरेपी दी गई। रोजाना ली जाने वाली इस टैबलेट ने मरीजों के जीवित रहने के समय को दोगुना कर दिया। टैबलेट लेने वाले मरीज औसतन 13.2 महीने तक जीवित रहे। जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीज सिर्फ 6.7 महीने ही जी सके। कीमोथेरेपी की तुलना में इस टैबलेट के साइड इफेक्ट्स भी कम देखे गए।