नई दिल्ली। फार्मास्युटिकल्स विभाग (DoP) ने दवा निर्माताओं से कहा है कि वे रिवैम्प्ड फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन असिस्टेंस स्कीम (RPTUAS) के तहत अपने पूरे दस्तावेज समय पर जमा करें, ताकि योग्य आवेदनों का निपटारा जल्दी हो सके। विभाग का कहना है कि योजना के कुल बजट के लगभग बराबर राशि की प्रोत्साहन मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।
यह जवाब फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (FOPE) की मांग पर आया है। FOPE के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश के. जैन ने लंबित आवेदनों पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि कई सदस्य इकाइयों ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, फिर भी उन्हें सहायता राशि नहीं मिली। नोडल एजेंसी SIDBI से पूछने पर बताया गया कि पर्याप्त फंड जारी नहीं हुआ है, जिससे MSME इकाइयां मुश्किल में हैं।
DoP के अनुसार सितंबर 2026 तक स्कीम स्टीयरिंग कमेटी ने 301 आवेदनों को करीब 300.48 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के लिए मंजूरी दी है। इनमें से 157 इकाइयों ने अपग्रेडेशन पूरा कर संशोधित शेड्यूल M या WHO-GMP का प्रमाणपत्र हासिल कर लिया है। 110 इकाइयों में काम चल रहा है और 4 की मंजूरी रद्द की गई है। 134 इकाइयों के 103.98 करोड़ रुपये के दावे स्वीकृत हो चुके हैं।
मार्च 2024 में शुरू हुई इस योजना का बजट 300.10 करोड़ रुपये है। 500 करोड़ रुपये से कम औसत टर्नओवर वाली दवा इकाइयां इसके तहत अधिकतम 2 करोड़ रुपये की सहायता पा सकती हैं।
