शिमला (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दवा निर्माता जैक्सन लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फिलहाल किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कंपनी ने राज्य लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा अपने दवा निर्माण लाइसेंस रद्द किए जाने और उसके बाद अपील खारिज होने को रिट याचिका के जरिए चुनौती दी है।
याचिका के अनुसार CDSCO बद्दी के अधिकारियों ने 9 से 13 जून 2026 तक कंपनी के प्लांट का निरीक्षण किया था। कंपनी का आरोप है कि यह निरीक्षण राज्य दवा विभाग के अधिकारियों की भागीदारी के बिना हुआ। कंपनी का यह भी कहना है कि 19 से 22 जून के बीच राज्य ड्रग इंस्पेक्टर के बाद के निरीक्षण में पहले बताई गई ज्यादातर कमियां सही नहीं पाई गईं।
कंपनी के मुताबिक 23 जून को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब के लिए सिर्फ चार दिन दिए गए, लेकिन उसी दिन लाइसेंस रद्द कर दिए गए। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया है कि बार-बार मांगने पर भी CDSCO की निरीक्षण रिपोर्ट नहीं दी गई। ड्रग्स रूल्स के नियम 85(3) के तहत की गई अपील 17 जुलाई को खारिज कर दी गई। कंपनी ने दोनों आदेशों को रद्द करने की मांग की है। मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार जैन ने पैरवी की है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट का यह आदेश केवल अंतरिम राहत है। निरीक्षण में गड़बड़ी और सुनवाई का मौका न मिलने जैसे आरोप कंपनी की ओर से लगाए गए हैं, जिन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
