22 से 24 जनवरी तक दवा दुकानें रहेंगी बंद

पटना, बृजेंद्र मल्होत्रा। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की राज्य स्तरीय बैठक 12 जनवरी को पटना में बुलाई गई जिसमें सदस्यों की व्यापार संबंधित फार्मासिस्ट की समस्या पर संगठन ने सरकार से रोज-रोज के झूठे आश्वासनों से किनारा करते हुए सदस्यों के व्यापारिक हित में आरपार की लड़ाई लड़ने का मन बैठक के दौरान बना ही लिया।
प्रदेशाध्यक्ष पीके सिंह ने सरकार को सदन की भावनाओं से अवगत करवाते हुए मीडिया के माध्यम से कहा कि दवा व्यवसाइयों को फार्मासिस्टों की कमी से जूझना पड़ रहा है जिससे औषधि प्रशासन का कोप भजन करना पड़ता है। सरकार को संगठन के माध्यम से कई बार गुहार लगाई हुई है कि फार्मासिस्टों की कमी को पूरा करने के लिए अनुभव आधार पर होलसेल की भांति फार्मासिस्ट का दर्जा दे दिया जाए या कोई शार्ट टर्म कोर्स के माध्यम से अनुभव आधार पर फार्मासिस्ट बनाये जाएं। परन्तु सरकार दवा विक्रेताओं की मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रही। इस कारण दवा व्यापारियों का आर्थिक शोषण व औषधि विभाग की तरफ से प्रताडऩा की जा रही है जिससे दवा व्यापारी वर्ग में असंतोष व्याप्त है। सरकार के दवा व्यापारियों के साथ सौतेले व्यवहार से कुंठित हो सरकार का ध्य्यानाकर्षन के लिए व व्यापारिक समस्या के ठोस समाधान के लिए तीन दिवसीय 22 से 24 जनवरी तक रिटेल व होलसेल दवा व्यवसाई अपने व्यापारिक संस्थान पूर्णत: बन्द रखेंगे। इस दौरान किसी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में कोई भी दवा व्यवसाई अपने प्रतिष्ठान को नहीं खोलेगा। भले उसकी दुकान शहर में हो या कस्बे में या अस्पताल परिसर में इस दौरान यदि कोई भी अप्रिय घटना दवा की कमी के कारण आती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। सिंह ने कहा कि यदि सरकार 3 दिन के दवा व्यवसाय पर तालाबन्दी से भी सबक नहीं लेती तो मार्च 2020 में राज्यभर के दवा व्यवसाई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को विवश हो जाएंगे। अत: सरकार आमजन की सम्भावित समस्या को ध्यान में रखते हुए दवा व्यवसाइयों की व्यापारिक समस्या के ठोस समाधान हेतु ठोस कदम उठा ले।

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