पीजी डॉक्टरों की रोटेशन को लेकर पीजीआई में घमासान

मेडिसन और सुपर स्पेशलिटी आमने-सामने
रोहतक: पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में मेडिसन विभाग और सुपर स्पेशलिटी विभाग इन दिनों पीजी डॉक्टरों की रोटेशन को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। यह खींचतान नई नहीं है बल्कि कई सालों से चली आ रही है। कुलपति के समक्ष इस मामले पर बैठक भी हो चुकी है लेकिन सुपर स्पेशलिटी के डॉक्टरों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
     पीजी डॉक्टरों की जंग में सीधे तौर पर अब मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. नित्यानंद शर्मा और पुलमोनारी एंड क्रिटिकल केयर यूनिट के हैड डॉ. धू्रव चौधरी आमने-सामने हैं। वहीं सुपर स्पेशलिटी में विभिन्न विभागों के डॉक्टरों की मांग है कि मेडिसन विभाग को पीजी डॉक्टरों पर एकाधिकार करने की बजाए हर विभाग में रोटेशन के हिसाब से भेजना चाहिए। लेकिन मेडिसन विभाग ऐसा नहीं कर रहा है। वह पीजी डॉक्टरों को अपने यहां से किसी अन्य विभाग में जाने ही नहीं देता।
     संस्थान के सूत्रों की मानें तो पुलमोनारी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसन के विभागाध्यक्ष डॉ. धू्रव चौधरी ने मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. नित्यानंद को इस संबंध में पत्र भी लिखा है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि कई बार आग्रह करने के बाद भी पीजी डॉक्टरों की रोटेशन नहीं की जा रही है। यह व्यवस्था पहले सही तरीके से चल रही थी लेकिन अब इसे रोक दिया गया है। नियमानुसार पीजी मेडिसन के डॉक्टरों को न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, हीमोटोलॉजी और पीसीसीएम आदि विभागों में रोटेशन के हिसाब से भेजा जाना चाहिए। मेडिसन विभाग में तकरीबन 22 पीजी सीट हैं। यह कोर्स तीन साल का होता है। सुपर स्पेशलिटी विभागों के डॉक्टरों की माने तो यदि पीजी डॉक्टरों का रोटेशन होता है तो उनके विभागों में काम का बोझ कम होगा और पीजी डॉक्टरों को भी सीखने का मौका मिलेगा।
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