टेटनस व डिप्थीरिया की एक बनेगी वैक्सीन

सोलन (हप्र)। केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली में अब टीडी (टेटनस कम एडल्ट डिप्थीरिया) वैक्सीन बनेगी। सीआरआई ने वैक्सीन के तीन एक्सपेरिमेंटल बैच निकालकर सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) कसौली में परीक्षण के लिए भेजे थे जोकि पास हो गए हैं। टेटनस व डिप्थीरिया दो बीमारियों के लिए एक ही वैक्सीन निर्मित करने वाला सीआरआई सरकारी क्षेत्र का पहला संस्थान होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के बाद संस्थान इस वैक्सीन पर दो साल से काम कर रहा है। अब संस्थान इसके व्यावसायिक उत्पादन की प्रक्रिया शुरू करेगा। उत्पादन की सारी रिपोर्ट ड्रग्स कंट्रोलर जरनल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को भेजी जाएगी। लाइसेंस मिलने के बाद उत्पादन शुरू होगा। इस साल के अंत तक इसके बैच निकल जाएंगे। गर्भवती महिलाओं, कटने व गलघोटू बीमारी के उपचार के लिए टीडी वैक्सीन का टीका लगेगा। किसी औजार से कटने व गर्भवती महिलाओं को टेटनस का टीका लगाना जरूरी होता है। डिप्थीरिया रोग के लिए डिप्थीरिया वैक्सीन का टीका लगता है। यह संक्रामक रोग है जो दो से 10 वर्ष तक के बच्चों को अधिक होता है। यह रोग प्राय: गले में होता है। इसके बैक्टीरिया टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करते हैं। सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, बुखार, खांसी आदि डिप्थीरिया बीमारी के लक्षण हैं। ऐसे में टेटनस व डिप्थीरिया दोनों तरह के रोगों के लिए एक ही टीडी वैक्सीन का टीका लगेगा। सीआरआई कसौली पीआरओ डॉ. संतोष कुट्टी ने बताया कि सीआरआइ में अब टेटनस कम अडल्ट डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया चल रही है। सीडीएल से तीन एक्सपेरिमेंटल बैच पास हो चुके हैं। अब संस्थान डीसीजीआई से वैक्सीन के व्यावसायिक उत्पादन के लाइसेंस के लिए आवेदन करेगा।

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