कैंसर, एफएसडीए, उत्तर प्रदेश, एनपीपीए, हेमंत राव

  • जमीनी नेता की छवि वाले विज को अधिकारी नहीं बता रहे जमीनी हकीकत
  • इंटरनेशनल फूड हब में शुमार गुडग़ांव से महीने में फूड जांच का एक सैंपल लिया
चंडीगढ़। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों के बीच जब तालमेल नहीं है, तो इनके साझा प्रयास से जनता की सेहत का ख्याल रखने की बात तो बेमानी ही लगती है। दो दिन पहले 17 मई को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के नाम से जारी सरकारी विज्ञप्ति में खाद्य एवं औषध प्रशासन की अप्रैल माह की कार्य रिपोर्ट को देख कर तो कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है।
सरकारी विज्ञप्ति में स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं हरियाणा के खाद्य एवं औषध प्रशासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न भागों में तम्बाकू, गुटका, सुपारी, पान मशाला, मिलावटी खाद्य और पेय पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अप्रैल माह में 52 नमूने एकत्र किए गए, जिनमें से 15 नमूने मानकों के अनुरूप नही पाये गए। विज्ञप्ति में बताया गया कि अप्रैल माह के दौरान अम्बाला जिले से 12 नमूने एकत्र किए गए हैं। इसी प्रकार हिसार से 5, करनाल से 4, रोहतक से एक, सिरसा से एक, गुडग़ांव से एक, रेवाड़ी से 2, जीन्द से एक, पानीपत से 4, कैथल से 3 तथा मेवात से 3, कुरूक्षेत्र से 5, पंचकूला से 5 तथा यमुनानगर में 5 नमूने एकत्र किए गए हैं। फूड सेफ्टी नियम तो कहते हैं कि एक जिले से एक महीने में 30 सैंपल लेना अनिवार्य है, लेकिन फूड सेफ्टी अधिकारी 21 जिलों में कुल 12 हैं और उनमें से भी फिलहाल 8 को ही काम करने का अधिकार है, तो नियम पूरे होना मुश्किल है। हालांकि जिले में सीएमओ के समन्वय में एसएमओ को फूड सैंपल भरने की पावर सरकार ने दे रखी है, लेकिन इस ‘पावर’ में करंट कहीं नजर नहीं आ रहा है।
खैर मुद्दे की बात पर आते हैं, मेडीकेयर न्यूज ने फूड सेफ्टी अधिकारी ओमकुमार से सवाल किया कि स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि आप ने रोहतक से अप्रैल महीने में एक ही सैंपल लिया है, यह सुनकर वह सकते में आ गए और तुरंत रिकॉर्ड खंगलवाया और बताया कि उन्होंने 8 सैंपल लिए हैं और बाकायदा उनका विवरण संवाददाता को बताया। अब स्वास्थ्य मंत्री को सच माने या फूड सेफ्टी अधिकारी को।
सवाल है कि क्या चंडीगढ़ में ऊंचे ओहदों पर बैठे अधिकारियों को जिलों से सही आंकड़ें नहीं मिल रहे, यदि मिल रहे हैं तो स्वास्थ्य मंत्री के नाम से जारी विज्ञप्ति में गलत आंकड़े मीडिया में क्यों दिए जा रहे हैं। जनता की सेहत कितनी सुधरेगी यह तो बाद की बात है, फिलहाल तो अधिकारियों की इस तरह की कार्यशैली से स्वास्थ्य मंत्री की छवि जरूर बिगड़ रही है।
 
सीआईडी सीरियल में एसीपी प्रद्युमन का चर्चित डायलॉग या आ गया
 ‘कुछ तो गड़बड़ है’।
इस विज्ञप्ति को ध्यान में रख, स्वास्थ्य मंत्री के साथ-साथ मीडिया को भी सजग रहने की जरूरत है। सरकारी विज्ञप्तियों में प्रस्तुत आंकड़ों की पड़ताल कर प्रकाशित करें, ताकि पाठकों तक सच्चाई पहुंचे।