कई महीनों से जन औषधि केंद्र में दवाओं का टोटा, पांच बार डिमांड भेज चुके हैं केंद्र संचालक

गोरखपुर। जन औषधि केंद्रों पर दर्द, बुखार, बीपी, शुगर सहित बच्चों की दवाएं पिछले चार माह से नहीं है। जबकि केंद्र संचालक पांच बार दवाओं की डिमांड भेज चुके हैं। इसकी वजह से मरीजों को महंगे दाम पर मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र के संचालक वसीउल्लाह खान ने बताया कि जिले में जन औषधि केंद्रों को दवाओं की आपूर्ति के लिए भारतीय जन औषधि परियोजना ने एक थोक दुकानदार को यह जिम्मेदारी दी थी। लेकिन यह केंद्र पिछले दो साल से बंद है।

इसकी वजह से लखनऊ, कानपुर, सुल्तानपुर से दवाएं मंगानी पड़ रही हैं। यहां पर दवाओं की डिमांड अन्य जिलों से भी है। इसकी वजह से पर्याप्त दवाएं मिल नहीं पा रही है। स्थिति ऐसी है कि बच्चों की एंटीबॉयोटिक दवाएं भी खत्म हो गई है। जोड़ों में दर्द के लिए बिकने वाले स्प्रे, दर्द निवारक जैसी सामान्य दवाएं भी खत्म हैं। जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल में बनाए गए जन औषधि केंद्रों पर दवाएं नाम मात्र की बची हैं। यही वजह है कि 10 से 15 हजार की दवा बेचने वाले केंद्र महज तीन-चार हजार रुपये की दवा बेच पा रहे हैं।