दो जगह तनख्वाह का स्वाद ले रहे राजस्थान फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. आलोक

जयपुर

गुरु जी बैंगन खाएं और चेलों को परहेज बताएं। यह कहावत राजस्थान फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. आलोक खुंटेटा पर सटीक बैठ रही है। क्योंकि डॉ. खुंटेटा काउंसिल के रजिस्ट्रार पद की जिम्मेदारी पर तो है हीं, बल्कि जयपुर के एक फार्मेसी कॉलेज में प्रोफेसर की भूमिका में भी उनका नाम चल रहा है। ऐसे में इतना तो तय है कि या तो वह सरकार को चुना लगा रहे हैं, या फिर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्योंकि व्यक्ति एक ही जगत अपनी उपस्थिति दे सकता है। सवाल यह भी कि यदि कोई फार्मासिस्ट दो जगह कार्य करता पकड़ा जाए तो उसका लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उस पर फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करने में देर नहीं लगाई जाती। लेकिन रजिस्ट्रार महोदय के खिलाफ कानूनी प्रावधान के तहत अभी तक कोई मुकदमा दर्ज या लाइसेंस निलंबन जैसी प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई। हालांकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जब अपराध सामने है, तथ्य मौजूद है तो देरी क्यों हो रही है, यह समझ से परे है।

फॉर्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बी. सुरेश इसे गंभीर अपराध मानते हैं। वह कहते हैं फार्मेसी काउंसिल नियमों के तहत एक व्यक्ति दो अलग-अलग संस्थानों में काम नहीं कर सकता है, क्योंकि इससे न केवल कार्यक्षेत्र प्रभावित होता है बल्कि गोपनीयता की गरिमा भंग होती है। उन्होंने इस मामले को सीधे-सीधे अपराध की श्रेणी में रखा है।