बेहतर जीवनशैली और पौष्टिक आहर से करें प्यार

हम सभी जानते हैं स्वास्थ्य लाभ सबसे बडा सुख है। चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक। इस बात को समझ कर मानव ने अनुभवों से शोध के जरिये कई प्रकार की पैथियों-थैरपियों की रचना की तथा स्वस्थ जीवनशैली के सूत्र खोजे।

हमने मौसम, पहर, पथ्य-अपथ्य, विपरीत आहार, आसन, प्राणायाम, मानव प्रकृती, आयु, लिंग और पर्यावरण आदि के हिसाब से स्वस्थ जीवनशैली को तय किया।

स्वस्थ्य जीवन की कूंजी बनाने के लिए काफी कुछ खोजा जा चुका है और आगे भी संभावनाएं अपार हैं लेकिन सवाल ये है कि जो हम खोज चुके हैं क्या हम वो सब व्यवहार एवं वयवस्था में ला पाए हैं। क्या हमने जरूरतों से ज्यादा अपनी आदतों और छोटी-छोटी मजबूरियों के आगे घुटने टेक कर स्वास्थ्य को किनारे नहीं कर दिया?

हम यह क्यों भूल रहे हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। इस वास (आवास ) को जहां हम उम्रभर रहते है, क्यों उसका उसका रखरखाव सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं।

हमारे शरीर में रचना (ब्रह्मा) पालन-पोषण (विष्णु ) विनाश (महेश) हमेशा चलता रहता है। हमारी शरीरिक व्यवस्था में निरंतर नई रचना चलती रहती हैं, नई कोशिकाएं बनती हैं और आहार से उनका पालन-पोषण होता है। फिर प्राकृतिक रूप से नष्ट भी होंते हैं। जब तक ये व्यवस्था प्राकृतिक रूप से चले तो ठीक है। परंतु जब इनमें से एक में एक में भी असंतुलन हो तो रोग का जन्म होता है।
हमारा शरीर नई कोशिकाओं की रचना के लिए वायु एवं आहार पर निर्भर है। ये शुद्ध ,पौष्टिक, शांति दायक हो तो स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होता है। अगर ऐसा ना हो तो स्वस्थ कोशिकाएं भी होमोटॉक्सिन एवं ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के प्रभाव में अस्वस्थ हो जाते हैं

मानव देह में बहुत सी क्रियाएं होती हैं। भोजन करने के बाद उसका शरीर के द्वारा पाचन और अवशोषन होता है। मेटाबोलिज्म के दौरान कुछ व्यर्थ पदार्थ भी बनते हैं, जिसे पाचनतंत्र और त्वचा द्वारा मल-मुत्र एवं पसीने के रूप में शरीर से निकाल दिया जाता है।

कुछ नकारात्मक पदार्थ शरीर से नहीं निकल पाते जो फ्री रेडिकल पैदा करते हैं ये फ्री रेडिकल्स कई गुणा होकर शरीर में जंग की तरह का ओक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते है एंटीओक्सीडेंटस ओक्सीडेटिव स्टे्रस रूपी जंग साथ क्रिया करके शरीर को उनसे होने वाले नकारात्मक प्रभाव से रक्षा करते है। एंटीओक्सीडेंट कई पदार्थों में पाया जाता है, परंतु ताजे फलों या हरी सब्जियों में ये प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। खाने के थाली में यदि इन खाद्य पदार्थों को जगह दें, तो तमाम तरह के विकारों से मुक्ति मिल सकती है।