जांच हो तो बिना कसूर फंसेगे कई रिटेलर

 

अगर शेड्यूल एच1 दवाओं की खरीद बिक्री के आंकड़े होलसेल दवा विक्रेताओं के यहां औषधि विभाग देखे और जिन-जिन रिटेल दवा विक्रेता के नाम पर बिल काटा गया है उस तह तक जाएं तो कई रिटेल विक्रेता ऐसे होंगे जिन्होंने व दवाइयां खरीदी ही नहीं, फिर भी होलसेल दवा विक्रेता न उसके नाम से बिल काटा है तो प्रथम दृष्टि में रिटेलर का फंसना तय है, या फिर होलसेल दवा विक्रेता उस दवा दुकानदार ने ही दवा ली इसका सबूत दे और सबूत फर्जी बिल काटने वाले होलसेलर के नहीं होगा। कई होलसेलर रिटेलिंग का भी कार्य करने से बाज नहीं आते हैं। जिन व्यक्तियों की शूगर हार्ट की दवाइयां चलती हैं वो सीधे होलसेलर से जाकर खरीदते है और होलसेलर बेखौफ होकर रिटेल में दवाइयां देते हैं। कई होलसेलर के यहां फर्जी झोलेछाप चिकित्सक सीधे दवाइयां खरीदने आते हैं। और कई होलसेलर फर्जी झोलेछाप चिकित्सक के यथा-स्थान पर फर्जी बिल बनाकर दवाईयां पहुंचाने का इन्तजामात तक करते हैं।

बड़ी-बड़ी दवा कम्पनियों से लेकर ओटीसी, जेनेरिक दवा कंपनियों के दवा प्रतिनिधि फर्जी झोलेछाप चिकित्सकों को सीधे होलसेल के यहां से दवाइयां लेकर सप्लाई करते हैं और पूरा का पूरा खेल होता है फर्जी बिलिंग से।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कई दवा विक्रेता मेडिकल स्टोर की आड़ में चिकित्सा भी कर रहे हैं मगर इन पर कार्यवाही नहीं होती है। कई क्षेत्रों में रिटेलर भी शेड्यूल एच1 की दवाइयां बिना चिकित्सक के पर्चे पर बेच रहे हैं जबकि शेड्यूल एच1 की दवाइयों की बिक्री का रिकार्ड भी निर्धारित शेड्यूल एच1 रजिस्टर में करना आवश्यक है, मगर कई रिटेल दवा विक्रेता ऐसे भी है जिनको शेड्यूल एच 1 दवाइयों की खरीद बिक्री का रिकार्ड रजिस्टर में करना है इसकी भी जानकारी नहीं है।

अगर औषधि विभाग नियमानुसार ऐसे होलसेल दवा व्यक्तियों के खिलाफ जो शेड्यूल एच1 की तस्करी का कार्य कर रहे हैं कठोर कार्यवाही करे तो आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले झोलेछाप चिकित्सकों के पनपने पर लगाम लग सकती है क्योंकि अगर झोलेछाप चिकित्सक को जब दवाइयां ही नहीं मिलेगी तो वो चिकित्सा कैसे करेगा।

मगर ऐसा होना सूई के छेद में से हाथी निकालने के समान होगा।

अब देखना यह है कि औषधि विभाग ऐसे दवा विक्रेताओं के खिलाफ जो बिना बिल व फर्जी बिल काटकर दवाइयां बेच रहे हैं उनके खिलाफ औषधि विभाग कोई कार्यवाही करेगा …………. या यूँ ही चलता रहेगा दवाइयों की तस्करी का गोरखधन्धा। पनपते रहेंगे फर्जी झोलाछाप चिकित्सक, होता रहेगा जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़।