डी-फार्मेसी के 700 फर्जी सर्टिफिकेट बांटे गए, अब तक 17 लोग गिरफ्तार

डी-फार्मेसी

लुधियाना। पंजाब में डी-फार्मेसी के 700 से अधिक फर्जी सर्टिफिकेट बांटे गए हैं। वहीं, इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह खुलासा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी, सतर्कता ब्यूरो) रविंदर पाल सिंह ने किया है। उन्होंने बताया है कि ब्यूरो उन सभी 700 लोगों का पता लगाएगा जिन्होंने डी-फार्मेसी प्रमाणपत्र हासिल किया है। इनमें से 65 से अधिक लाभार्थियों का पता लगाया जा चुका है और 9 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

12वीं कक्षा के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए

बता दें कि पिछले दिनों राज्य फार्मेसी काउंसिल के अधिकारियों और फार्मेसी कॉलेज मालिकों की मिलीभगत से अवैध तौर पर डी-फार्मेसी के सर्टिफिकेट जारी करने का मामला सामने आया था। इस मामले की जांच में लाभार्थियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 12वीं कक्षा में विज्ञान स्ट्रीम का विकल्प नहीं चुना था। अतिरिक्त पैसे देकर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से 12वीं कक्षा के प्रमाण पत्र की व्यवस्था की थी। उन्होंने कभी इन राज्यों का दौरा नहीं किया है। इस जांच में 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए।

मिलीभगत से चलता रहा खेल

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सतर्कता अधिकारियों के अनुसार अधिकतर सर्टिफिकेट 2016 से पहले जारी किए गए थे। आरोपी निजी कॉलेजों के अधिकारियों के साथ सांठगांठ किए हुए थे। जो फार्मेसी में डिप्लोमा प्राप्त करने के इच्छुक उम्मीदवारों को लाते थे। आरोपी डी-फार्मेसी की फीस और साइंस स्ट्रीम के साथ 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्रों की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त शुल्क लेते थे।

इनको किया गया गिरफ्तार

सतर्कता ब्यूरो ने इस घोटाले में गुरप्रीत सिंह गिल और प्रिंसिपल सरबजीत सिंह बराड़ को गिरफ्तार कर लिया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिंह ने कहा कि इससे पहले अधीक्षक अशोक कुमार,पीएसपीसी के दोनों पूर्व रजिस्ट्रार परवीन कुमार भारद्वाज और डॉ. तेजवीर सिंह को भी गिरफ्तार किया था। इस मामले में नौ फार्मासिस्टों को भी नामजद कर गिरफ्तार किया गया था।

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