सरकारी दवा स्टोर में भ्रष्टाचार, गुस्से में डीएम

खगडिय़ा (बिहार): लगातार तीन दिन तक चली जिला दवा भंडार की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, स्वास्थ्य विभाग में बैठे अफसरों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उतनी ही गहरी होती जा रही है। डीएम जय सिंह के निर्देश पर एसडीओ मनेश कुमार मीणा के नेतृत्व में टीम द्वारा दवा भंडार के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जिला दवा भंडार की जांच तो पूरी कर ली गयी है लेकिन सदर अस्पताल परिसर स्थित दो अन्य दवा भंडार की जांच बाकी है। जिसे शीघ्र पूरा करने की बात कही जा रही है।

सूत्रों की माने तो डीएम ने स्वास्थ्य विभाग से वर्ष 2016-17 और 17 -18 में खरीदी गयी दवाओं का ब्यौरा तलब किया है, जिसमें दवा का नाम, मूल्य, क्रय का विवरण आदि की पूरी जानकारी ली जा रही है। हैरानी की बात ये कि करोड़ों की दवा के साथ-साथ मेडिकल उपकरण खरीद में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है लेकिन दवा के साथ उपकरणों का ब्योरा नहीं मांगा गया। दबी जुबान में बात उठ रही है कि सीएस कार्यालय से सटे जिला स्वास्थ्य समिति के गोदाम की निष्पक्ष ढंग से जांच हो जाए तो कई सफेद चेहरों का काला सच बाहर आ सकता है।

हालांकि टेंडर के नाम पर हेराफेरी कर लाखों के मेडिकल उपकरण सहित दवाओं में धांधली का कच्चा चिठ्ठा डीएचएस गोदाम में मौजूद है। बताया जाता है कि बीते वित्तीय वर्ष में बिना टेंडर के मनपसंद आपूर्तिकर्ता से लाखों रुपये का सामान और दवा खरीदी गई थी। इसमें कई अफसरों की जेब गरम होने की चर्चा है। स्वास्थ्य विभाग पारदर्शी तरीके से दवा खरीद का दावा कर रहा है। डीएम जय सिंह द्वारा जिला दवा भंडार के भौतिक सत्यापन सहित गड़बडिय़ों की जांच के लिए एसडीओ मनेश कुमार मीणा के साथ कार्यपालक दंडाधिकारी राजीव रंजन और लिपिक अनिल कुमार को भी मुख्य रूप से टीम में शामिल किया है। टीम ने शनिवार तक दवा भंडार कक्ष पहुंच कर घंटों फाइलों के साथ माथा-पच्ची कर दवा खरीद का रिकॉर्ड खंगाला है। एक केंद्रीय दवा भंडार कक्ष की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि दवा घोटाले में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।