नई दिल्ली। ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर होने लगी हैं। संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया पर इनका प्रभाव कम देखा जाने लगा है। ऐसे में गंभीर मरीजों का इलाज बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे मरीजों के लिए सेफेपिम-जिडेबैक्टम दवाओं के मेल से उम्मीद जगी है।
भारत समेत कई देशों के अस्पतालों में एक अध्ययन हुआ है। इसमें नई दवा से इलाज पाने वाले 91.7 फीसदी मरीजों को ठीक पाया गया। हालांकि, यह शुरुआती नतीजा है। इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए आगे भी अध्ययन जरूरी हैं। अध्ययन में कुल 72 वयस्क मरीजों को दवा दी गई।
इनमें 68 मरीजों में ऐसे बैक्टीरिया का संक्रमण था। जिन पर कार्बापेनेम समूह की ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही थीं। इनमें से 56 मरीजों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया एमबीएल नाम का एंजाइम बना रहे थे। भारत भी इस अध्ययन में शामिल
अध्ययन में भारत के कई चिकित्सा केंद्रों के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मरीजों को सात से 21 दिन तक नस के रास्ते दवा दी गई। इसके बाद संक्रमण पर दवा के असर का आकलन किया गया।




