बेंगलुरु (कर्नाटक)। फाइजर कंपनी के लेबल वाली नकली दवाएं जब्त की गई हैं। गिरोह की जांच में विदेश तक फैले नेटवर्क का पता चला है। गिरोह का सरगना आर. प्रशांत रंजन बाबू तुर्किये से दवाओं के लेबल मंगवाता था। प्रशांत अजरबैजान में रह रहा था।

गिरोह इन लेबल और क्यूआर कोड की नकल कर नकली लेबल तैयार करता था। इन्हें स्कैन करने पर भी नकली होने का पता नहीं चलता था। जांच में फाइजर के लेबल वाली करीब 10 हजार शीशियां मिली हैं। वहीं, बेंगलुरु में बिदादी और दोड्डेरी में रेड के दौरान 5 करोड़ की नकली दवाएं मिली। वहीं, बिल, इंजेक्शन भरने के उपकरण और नकली लेबल मिले थे। मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले दिल्ली-एनसीआर के नकली कैंसर दवा गिरोह के तार तुर्किये और चीन से जुड़े मिले थे। यूरोप और ब्रिटेन में भी तुर्किये और दुबई के रास्ते चलने वाले ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई तेज हुई है।

आरोपी हवाला और क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग कर रहे थे। इसकी जांच शुरू हो चुकी है। प्रशांत अजरबैजान में रह रहा था। वहीं से नेटवर्क को दूर से संचालित कर रहा था। उसे भारत लाने के लिए जांच एजेंसियां कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।