मुंबई। सन फार्मा और 8 अन्य दवा कंपनियों के साथ ट्रंप ने डील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दवाओं की कीमतों को लेकर समझौते की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने अपने ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ प्रोग्राम का विस्तार किया है। इसका मकसद दवाओं की कीमतों को दूसरे देशों की कीमतों के बराबर लाना है।
इस समझौते में भारतीय दवा कंपनी सन फार्मा शामिल है। वहीं एल्कोन, एस्टेलस फार्मा, बी-वन मेडिसिन्स, ब्रिज-बायो, सीएसएल, क्योवा किरिन, टेवा फार्मास्यूटिकल्स और यूसीबी के नाम भी हैं।
26 कंपनियों के साथ समझौता
अब समझौते वाली फार्मास्युटिकल कंपनियों की कुल संख्या 26 हो गई है। इस प्रोग्राम में शामिल कंपनियां अब अमेरिका के ब्रांडेड दवा बाजार का 89 फीसदी हिस्सा रखती हैं। कंपनियों ने रूस्नहृ कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने का वादा किया है। ट्रंप ने कीमतों में कटौती को अमेरिकियों के लिए हेल्थकेयर की लागत कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
19.6 अरब डॉलर का निवेश
ये नौ कंपनियां जल्द ही अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में कम से कम 19.6 अरब डॉलर का निवेश करेंगी। कई कंपनियां अमेरिकी सरकार के स्ट्रैटेजिक रिजर्व के लिए एपीआई दान करने पर भी सहमत हुई हैं। इन समझौतों में हिस्सा लेने वाली दवा कंपनियों के लिए इंसेंटिव (प्रोत्साहन) भी शामिल हैं। ये नए समझौते फाइजर, एली लिली और एमजेन जैसी 17 बड़ी दवा कंपनियों के साथ पहले हुए समझौतों को आगे बढ़ाते हैं।










