स्वास्थ्य मंत्रालय के एक्शन का जमीनी सच

नई दिल्ली: बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान महत्वपूर्ण है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान नवजात शिशुओं की मृत्यु के 20 प्रतिशत मामलों को कम कर देता है। नवजात शिशुओं को जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता उनकी स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में निमोनिया से 15 गुना और पेचिश से 11 गुना अधिक मृत्यु की संभावना रहती है। साथ ही स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में मधुमेह, मोटापा, एलर्जी, दमा, ल्यूकेमिया आदि होने का भी खतरा रहता है। स्तनपान करने वाले बच्चों का आईक्यू भी बेहतर होता है।

इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण एक सितंबर से 7 सितंबर, 2017 तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मना रहा है। इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का विषय है ‘ नवजात शिशु एवं बाल आहार प्रथाएं (आईबाईसीएफ): बेहतर बाल स्वास्थ्य।’ इस अवधि के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और उनकी बेहतरी में उचित पोषण के महत्व के बारे में जन जागरूकता पैदा करने के लिए एक सप्ताह का अभियान चलाया जा रहा है।

नवजात शिशु एवं बाल आहार प्रथाओं को अधिकतम बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने ‘मां- मां की असीम ममता’ कार्यक्रम शुरू किया है ताकि देश में स्तनपान का दायरा बढ़ाया जा सके। मां कार्यक्रम के अंतर्गत स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम प्रबंधकों सहित डॉक्टरों, नर्सों और एएनएम के साथ करीब 3.7 लाख आशा और करीब 82,000 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को संवेदनशील बनाया गया है और 23,000 से ज्यादा स्वास्थ्य सुविधा कर्मचारियों को आईबाईसीएफ प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही उपयुक्त स्तनपान परंपराओं के महत्व के संबंध में माताओं को संवेदनशील बनाने के लिए ग्रामीण स्तरों पर आशा द्वारा 1.49 लाख से अधिक माताओं की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
इस सप्ताह के दौरान कार्यक्रम प्रबंधकों के साथ माताओं की बैठकें और ब्लॉक/जिला स्तर की कार्यशालाओं के आयोजन की भी योजना बनाई गई है। समुदाय में आईबाईसीएफ प्रथाओं में परिवर्तन लाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों में ग्रामीण स्तर पर ग्राम स्वास्थ्य और पोषण दिवस आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक सुविधाओं में स्तनपान प्रबंधन केन्द्रों पर राष्ट्रीय दिशा निर्देश हाल ही में जारी किए गए हैं ताकि स्तनपान प्रबंधन केन्द्रों की स्थापना को आसान बनाया जा सके और बीमार और समय से पूर्व जन्मे बच्चों को सुरक्षित मानव स्तन दुग्ध मिल सके

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