फर्जी डॉक्टरों के नाम पर दे डाली लाखों की सेलरी 

नई दिल्ली। उत्तर रेलवे के केंद्रीय अस्पताल में वेतन घोटाला प्रकाश में आया है। अस्पताल में नौ फर्जी डॉक्टरों के नाम पर दो सालों से वेतन, भत्ते व एरियर का भुगतान किया जा रहा था। किसी अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। लेखा विभाग ने मामला सतर्कता विभाग को सौंप दिया। प्रारंभिक जांच के बाद अस्पताल के सीनियर क्लर्क को निलंबित कर पहाडग़ंज थाने में शिकायत की गई है। आरोपी उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन केंद्रीय अस्पताल इकाई का अध्यक्ष भी है।
गौरतलब है कि केंद्रीय अस्पताल का वेतन पास करते समय उत्तर रेलवे के लेखा विभाग को कुछ कर्मचारियों को हो रहे भुगतान पर शक हुआ। विभाग की टीम ने अस्पताल में रिकार्ड खंगाला। गड़बड़ी के संदेह में जांच सतर्कता विभाग को सौंप दी गई। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि लगभग दो वर्ष पहले नौ लोगों के नाम रिकार्ड में दर्ज किए गए थे, जिनका कोई अता-पता नहीं है। इन लोगों को 80 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान हो चुका है। इस मामले में सीनियर क्लर्क भरत धूपड़ को निलंबित कर रिकार्ड जब्त कर लिया गया है। अफसरों का कहना है कि वेतन में गड़बड़ी की जांच का काम सीनियर पर्सनल मैनेजर का होता है, जो जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा है। इसलिए उसका भी तबादला कर दिया गया है। विभागीय जांच के साथ पुलिस भी जांच कर रही है। आशंका है कि यह राशि करोड़ों में जा सकती है। अफसरों का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन आइ पास नामक सॉफ्टवेयर में दर्ज होता है। इससे रिकार्ड की जांच में आसानी होती है। इस संबंध में उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नितिन चौधरी का कहना है कि मामले की जांच हो रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।